विषय - नेटवर्क मार्केटिंग के प्रति गलत धारणाएं।
प्रिय पाठक गण
आज भारत ही नहीं विश्व के बहुतायत देशों में नेटवर्क मार्केटिंग बिज़नेस संचालित हो रहा है लेकिन भारत में इस बिजनेस को लोग अच्छी दृष्टि से नही देखते हैं इस बिजनेस को करने वालो के प्रति लोगों का दृष्टिकोण अच्छा नही होता है लोग इसे या तो फालतू समझते है या ठग के रूप मे देखते है जबकि अन्य देशों में इस बिजनेस को करने वाले लोग सम्मानजनक नजरिए से देखें जाते है उनको कोई भी हीन दृष्टि से नही देखता है।
मेरे दृष्टि में इसके तीन कारण समझ में आता है जिस कारण से वहा के लोग इनको सम्मान देते हैं और वही तीन कारणों के अभाव के कारण भारत में इस बिजनेस को गलत निगाहों से देखा जाता हैं।
कारण ::-
1-अमेरिका आदि देशों में नेटवर्क मार्केटिंग को लीगल व्यवसाय घोषित किया गया है इस व्यवसाय कि प्रति लोगों को जागरूक किया गया है जबकि भारत में यह व्यवसाय आज भी अघोषित है कानूनी मान्यता प्राप्त होने के बावजूद आज भी सरकार के तरफ से इसका प्रचार प्रसार नही किया गया है जिस कारण इस बिजनेस के प्रति लोग अनजान है और संकालू दृष्टिकोण रखते है।
2- अमेरिका आदि देशों में लोग नई तकनीक नई व्यस्था को जल्द ही स्वीकार कर लेते है जबकि भारत में लोग नई तकनीक नई व्यस्था के प्रति जागरूक नही होते हैं बल्कि उसे शक कि नजर से देखते है यहां प्रचार प्रसार को महत्व दिया जाता हैं जिसका टेलीविजन आदि पर प्रचार आदि आता है उसको विश्वसनीय माना जाता है जिसका प्रचार प्रसार नही है उसपर शक, संदेह किया जाता है यहां के लोग बाबा आदम के जमाने से चली आ रही परंपरा पर ज्यादा विश्वास करते है यही कारण है नई बातों को जल्द स्वीकार नहीं कर पाते है।
3- अमेरिका आदि देशों में बहुतायत संख्या में लोग इस व्यवसाय को करते है इसलिए वहां के लोग इस बिजनेस को करने वाले लोगों के प्रति विश्वास, सम्मान, और लीगल कारोबारी (जायज व्यवशायी) मानते है जबकि भारत में इस कारोबार को करने वाले यदा कदा कही कोई मिल जाता हैं इसलिए उस व्यक्ति को अनलीगल,ठग,धूर्त, और शक कि नजर से देखते हैं और इस व्यवसाय को धोखा, फसने फसाने का धंधा, टोपी पहनाने का धंधा जैसे शब्दों से नवाजा जाता हैं।
एक और कारण है जो इस व्यवसाय के प्रति लोगों को उदासीन बनाती हैं और वह है पिरामिड स्कीम वाली कंपनिया, पहले भारत में इस व्यवसाय के प्रति कोई सपष्ट कानून नही होने से भारत में बहुत सी पिरामिड स्कीम वाली कंपनिया आई और लोगों का पैसा लेकर चंपत हो गई इस कारण से भी लोगों का नजरिया इस व्यवसाय के प्रति गलत हो गया लेकिन आज भारत में यह व्यवसाय कानूनी और जायज है इसके प्रति कानून बन चुका है इसलिए अब यह व्यवसाय मान्यता प्राप्त हो चुका है और वर्तमान समय में सबसे अधिक टैक्स देने वाली कोई व्यवसाय है तो डायरेक्ट सेलिंग अर्थात नेटवर्क मार्केटिंग है।
।। अद्वतीय विशेषता ।।
नेटवर्क मार्केटिंग के कुछ अद्वतीय विशेषताएं हैं जिसको हर व्यक्ति को जानना चाहिए ।
पहली विशेषता यह है कि इस बिजनेस को करने के लिए पूंजी कि जरूरत नहीं है 1000 या 2000 रुपए से आरंभ हो जाता हैं इसलिए कम से कम पूंजी वाले भी इस बिज़नेस को कर सकते है।
दूसरी विशेषता है कि इस बिजनेस को करने के लिए आपको कोई अतिरिक्त खर्च नही करना है जैसे ऑफिस का खर्च, टेबल कुर्सी का खर्च, कर्मचारी का खर्च, कंप्यूटर आदि का खर्च, बिजली आदि का कोई खर्च नही है अर्थात किसी अन्य सेटअप कि जरूरत नहीं है।
तीसरी बात मौजूदा प्रोफेशनल कार्य को छोड़े विना इस बिजनेस को किया जा सकता है उदाहरण से समझे मानाकि हम पहले से कोई कार्य कर रहे हैं जैसे नौकरी में है व्यापार में है खेती करते है या कोई अन्य कार्य करते है तो भी इस बिजनेस को अलग से अपने समय के अनुसार टाइम निकाल कर कर सकते है यहां कोई टाइम का बंधन नही है कितने घंटा काम करते हैं उससे भी मतलब नहीं है आप जितना कर सकते है उतना ही करे अर्थात काम करने की पुरी आजादी है।
चौथी विशेषता यह कि यहां कोई आपका बास
नही है काम कम हुआ ज्यादा हुआ यह कोई पूछने वाला नहीं है क्योंकि जो भी करेंगे अपने लिए करेंगे जितना करेंगे अपने लिए करेंगे अतः यहां काम का कोई दबाव प्रेसर आदि नही है।
पांचवी विशेषता यहां अमीर गरीब जाति धर्म आदि कोई भेद नहीं है सबके लिए समान अवसर प्राप्त है और हर व्यक्ति के प्रगति का समान अवसर है यहां किसी के लिए विशेष लाभ जैसा कुछ नही है क्योंकि कम्पनी के नियमानुसार कार्य चलता है।
क्षठी विशेषता यहां आपकी सफलता के लिए आपके सभी अपलाइन मेहनत करते है क्योंकि आपकी आमदनी से उनको आमदनी होता है इसलिए आपके इनकम के लिए वो लोग सहयोग के लिए हमेशा खड़े होते है ट्रेनिंग सेमिनार आदि सभी सुविधा आपको मुहैया कराते हैं अतः यह बिजनेस सभी को करना चाहिए यहां आम के आम गुठलियों के भी दाम मिलता है।
इस बिजनेस के बहुत सी बाते है जिसको आप इस विडियो की माध्यम से भी समझ सकते है।
डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस दुनिया का बेहतरीन बिजनेस है इसे फसने फसाने का बिजनेस ना समझे वर्ना एक बेहतरीन opportunity से
हांथ धो देंगे अर्थात एक बहुत बड़े लाभ से वंचित रह जायेंगे इस लिए इसको समझना जरूरी है इसे समझकर इसका लाभ उठाना बुद्धिमानी है।
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अरविन्द कुमार तिवारी (Director of Ift multitrede Pvt Ltd)
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जन्म कुण्डली निर्माण मे इष्टकाल और लग्न का बहुत ही महत्व होता है यह आप सब दिनमान से लग्न निकालने की विधि से जान चुके होंगे ।यह इष्टकाल जितना शुद्ध होगा उतना ही शुद्ध लग्न होगा और उतना ही शुद्ध कुण्डली अर्थात् जन्म पत्रिका बनेगी । कहने का मतलब है इष्टकाल जन्म पत्रिका रूपी महल (मकान) का नीव (आधार) है यह आधार जितना मजबूत होगा मकान उतने मजबूत बनेगी इसी प्रकार से इष्टकाल जितना शुद्ध होगा कुण्डली उतनी ही शुद्ध बनेगी । अभी तक आपलोगों ने दिनमान से इष्टकाल निकालने की विधि को जाना है अब हम सूर्योदय से इष्टकाल और लग्न निकालने की विधि लिखेंगे जो दिनमान की विधि से बहुत ही आसान और सरल है इसे हम आसानी से समझ सकते है । जिस प्रकार हम दिनमान से लग्न निकालते है ठीक उसी प्रकार से सूर्योदय से निकालेंगे वैसे दोनो का परिणाम एक समान ही आता है पर कभी कभी एकाध पल का अंतर आ जाता है । सबसे पहले हम पंचांग मे लिखित सूर्योदय को नोट कर ले इस सूर्योदय मे संकेता अनुसार रेलवे अंतर का संस्कार करे ।संस्कार करने के बाद जो समय आयेगा उसको नोट करले तथा जन्म समय मे इस संस्कारित समय को घटा कर शेष को घटी पल बनाले तथा इ...
😓 प्रिय पाठक गण- 💢 जनम कुंडली निर्माण में जिस प्रकार पत्रिका शुद्ध बने इसकी व्यवस्था हमें करनी पड़ती है वैसे ही जन्म कुण्डली हर संसाधनों से परिपूर्ण हो इसकी भी हमें व्यवस्था करनी पड़ती है क्योंकि कुण्डली निर्माण के बाद जब हम फलादेश करते है तब हमें इन संसाधनों कि आवश्य्कता पड़ती है | ज्योतिष के बहुत सारे संसाधनों में एक संसाधन पंचधा मैत्री चक्र है यह चक्र बहुत ही आवश्यक है इसी चक्र से पता चलता है कि कौन ग्रह हमारे लिए शुभ है और कौन ग्रह अशुभ है किसकी दशा शुभ होगी और किसकी दशा अशुभ होगी यदि यह चक्र शुद्ध नहीं बना तो पता चलेगा शुभ ग्रह को हमने अशुभ घोषित कर दिया और अशुभ को सम बना दिया तो मनुष्य के जीवन से जनम कुण्डली का मिलान नहीं हो पायेगा और सब उलट पलट फलादेश होने लगेगा इसलिए जरुरत है कि हम शुद्ध पंचधा चक्र का निर्माण करे | शुद्ध पंचधा चक्र का निर्माण करने से पहले हम यह जानेंगे की इस चक्र को पंचधा कहते क्यों है क्या है इस चक्र में और क्यों जरुरत है इस...
जन्म पत्रिका मे भयात भभोग का बहुत महत्व होता है भयात भभोग इतने उपयोगी होते है कि इसके विना ज्योतिष का कोई भी कार्य सम्पन्न नही हो सकता है अतः ज्योतिष कार्य के लिये भयात भभोग आवश्यक है । भयात के लिये शास्त्रों मे लिखा है । नक्षत्रारम्भत: स्वेष्टकालं यावद् गतं हि तत् । घटयादिकं भयातं तद भस्य भोगो भभोग:।। वर्तमान नक्षत्र आरंभ से लेकर इष्टकाल पर्यंत जितना समय (घटी पल) व्यतीत हुआ हो वह भयात होता है और नक्षत्र के आरंभ से अंत तक का समय (घटी पल) भभोग कहलाता है । इस प्रकार से पंचांग मे नक्षत्र के घटी पल देखकर सहजता से भयात भभोग बन जाता है । इसे और सहज रूप से समझने के लिये दूसरे सूत्र का प्रयोग करना चाहिए जो बहुत ही सहज है । षष्टया गतर्क्षघट्याद्यं शोध्यं स्वेस्ट घटी युतम । भयातं स्यात् तथा स्वर्क्षघटीयुक्तं भभोगक: ।। गत (वर्तमान से पहला नक्षत्र की पंचांगस्थ घटी को 60 मे घटा कर शेष मे इष्टकाल जोडने से भयात होता है और उसी शेष मे वर्तमान नक्षत्र की पंचांगस्थ घटी पल जोडने से भभोग होता है । नोट- पंचांगर्क्षघटी मानादिष्टकालो$धिकस्तदा । तदन...
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